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<title>Balsanskar Hindi</title>
<language>en-us</language><link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/</link>
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<title> बच्चो, भगवानजीका<br> पूजन-अर्चन  उपासना आदि करें !</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/587.html</link>
<description>यदि भगवानजीका पूजन हो गया हो, तो स्नानके (नहानेके)  उपरांत सर्वप्रथम भगवानजीके सामने खडे होकर हलदी-कुमकुम एवं पुष्प अर्पण करें । अगरबत्तीद्वारा भगवानजीकी आरती उतारें (अगरबत्ती दिखाएं) ।</description>
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<title>बच्चोंकी विविध मानसिक समस्याएं<br> तथा उनपर किए जानेवाले घरेलू उपाय </title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/512.html</link>
<description>हम बच्चोंमें सदैव दिखनेवाली तथा जिनपर घरेलू उपाय करने संभव हैं, ऐसी कुछ ओंपर विचार करेंगे ।</description>
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<title>बच्चोंको अच्छी आदतें लगने <br>हेतु उनपर करने योग्य घरेलू मानसोपचार </title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/507.html</link>
<description>‘विश्व ही एक रंगभूमि है’, एक मानसशास्त्री कहता है, ‘‘घर ही  प्राथमिक रंगभूमि है । वहां कौनसे पात्रको वैâसे निभाना है, यह बच्चे सीखते हैं ।’’ </description>
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<title>सोलह संस्कार करनेके उद्देश्य </title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/189.html</link>
<description>भारतीय परंपराके अनुसार मनुष्यका प्रत्येक कृत्य संस्कारयुक्त होना चाहिए । सनातन धर्मने प्रत्येक जीवको सुसंस्कृत बनाने हेतु गर्भधारणासे विवाहतक प्रमुख सोलह संस्कार बताए हैं । इन संस्कारोंका उद्देश्य इस प्रकार है -</description>
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<title>बच्चोंपर संस्कार कबसे करें ?</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/28.html</link>
<description>गर्भपर उचित संस्कार कैसे करें ? : मां-पिता एवं परिवारके व्यक्तियोंके सात्त्विक विचारोंका भी गर्भके मनपर प्रभाव पडता है । इस सात्त्विक वातावरणका शिशुके शारीरिक एवं मानसिक विकासपर अच्छा परिणाम होता है ।</description>
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