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<title>Balsanskar Hindi</title>
<language>en-us</language><link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/</link>
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<title>जहां भक्ति वहां ईश्वरकी बस्ती</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/642.html</link>
<description>मंगलवेढाके संत चोखामेलाकी विट्ठलभक्ति अपार थी । वे निरंतर विट्ठलके नामस्मरणमें ही मग्न रहते थे । प्रत्यक्ष भगवान विठ्ठल ने उनके घर आकर भोजन किया इसे देखकर लोगोंको उनकी महानता का प्रत्यय आया ।</description>
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<title>कवि कालिदासजीकी कुशाग्र बुदि्धमत्ता</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/641.html</link>
<description>भोजराजाकी राजसभामें कालिदास नामक एक महान विद्वान कवि थे । स्वयं राजा भोज भी अनेक निर्णय लेनेमें कवि कालिदासके मत सुनते थे । कालिदास सभी विद्वानोंका आदर करते थे । कवि कालिदासजीकी ऐसीही कुशाग्र बुदि्धमत्ता प्रतीत करनेवाली यह कहानी है ।</description>
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<title>परीक्षाके लिए निकलनेसे लेकर उत्तरपुस्तिका पूर्ण लिखनेतक बरतनेयोग्य सावधानी !</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/640.html</link>
<description>परीक्षाके लिए जाते समय आसन क्रमांक (सीट क्रमांक), अतिरिक्त उत्तर-पुस्तिकाएं, पर्यवेक्षकोंके हस्ताक्षर ऐसी अनेक बातोंका आपको सामना करना पडता है ।इस तनावके कारण साधारण लगनेवाली बातोंमें भी आपसे चूक (गलतियां) हो सकती हैं । इन चूकोंसे बचने हेतु आगे कुछ सूत्र दे रहे हैं ।</description>
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<title>अध्ययनके लिए<br/> बैठनेके स्थलपर देवताओंके चित्र रखें !</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/639.html</link>
<description>अध्ययन करते समय देवताओंके चित्र रखनेसे तथा प्रार्थना करनेसे क्या लाभ होते है इस संबंधी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत लेख मे हम देखेंगे ।</description>
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<title>विद्यार्थियो, केवल परीक्षार्थी न बनें,<br/> तो वास्तवमें विद्यार्थी बननेका प्रयास करें !</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/638.html</link>
<description>आजकल अधिकांश विद्यार्थी एक कक्षासे दूसरी कक्षामें जानेको ही अध्ययन समझते हैं । उनके लिए यही अध्ययनकी परिभाषा है । इसलिए बच्चे अज्ञानवश विद्यार्थी बननेके स्थानपर परीक्षार्थी बनते जा रहे हैं ।</description>
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<title>प्रत्यक्ष प्रश्नपत्र हल करना</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/637.html</link>
<description>विद्यार्थीयोंको परीक्षा मे प्रश्नपत्र मिलने के बाद उसपर कैसे विचार करना चाहिए, उत्तर लिखते समय कौनसी सावधानिया रखनी चाहिए, आदी विषय मे संक्षिप्त जानकारी इस लेख मे दी गर्इ है ।</description>
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<title>ईश्वरीय अवधानमें निरंतरताका आनंद</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/636.html</link>
<description>बाह्यरूपसे हम कोई भी काम कर रहे हों, परंतु अंतर्मनसे निरंतर ईश्वरके अवधानमें रहना चाहिए। निरंतर ईश्वरका नाम लेनेसे हमारा प्रत्येक कृत्य ईश्वरकी इच्छाके अनुसार होता है । ऐसा विचार होनेसे हमें शांति तथा समाधान मिलता है ।</description>
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<title>त्यागसे ही ईश्वरप्राप्ति संभव !</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/635.html</link>
<description>संत तुकाराम महाराज की ईश्वरपर दृढ श्रद्धा थी, इसिलिए वो सर्वस्वका त्याग कर सके । उनकी त्यागी वृत्ति का एक उदाहरण इस कथासे देखेंगे ।</description>
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<title>संतोंकी क्षमाशीलता (संतोंका क्षात्रधर्म)</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/634.html</link>
<description>संत तुकाराम महाराजजीकी अपकीर्ति करनेवाले कुछ लोंगोको अपनी लीला दिखाकर उनको क्षमा करके चूक स्वीकारनेपर मजबूर कर दिया । तथा उन्हे उस कृत्य के लिए क्षमा भी कर दी । ऐसी क्षमाशीलता प्रतीत करनेवाली कहानी यहा देखेंगे ।</description>
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<title>संत गोंदवलेकर महाराजजीका आज्ञापालन</title>
<link>http://balsanskar.com/hindi/lekh/633.html</link>
<description>संत गोंदवलेकर महाराजजीने अपने गुरु प.पू. तुकामार्इ महाराज के हर एक आज्ञाका पालक किया इसिलिए उन्हें उनके गुरुके आशीर्वाद मिले तथा उनपर प्रभु श्रीरामकी अखंड कृपा हुई । उनके आज्ञापालन का एक उदाहरण इस कथासे देखेंगे ।</description>
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