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निराशा अथवा परीक्षामें असफल होनेपर आत्महत्याका विचार करना, मूर्खता है!
कुछ वर्षों पूर्व माध्यमिक अथवा महाविद्यालयीन परीक्षाओंके परिणाम घोषित होनेपर असफल द्यार्थियोंद्वारा आत्महत्याके गिने-चुने समाचार सुननेको मिलते थे ।
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पाठशालाको विद्याका मंदिर समझकर आदर्श पद्धतिसे आचरण करें !
बच्चो, आगामी जीवनमें सफल होनेके लिए पाठशालामें प्रामाणिकतासे आचरण कर एवं गुणसंपन्न बनकर हिंदुस्थानके भावी आधारस्तंभ बनें !
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पाठशाला जानेकी पूर्वसिद्धता कर, साधिए मनकी एकाग्रता
बच्चो, स्मरण कीजिए कि हम पाठशाला जाते समय कैसे जाते हैं ? देर राततक दूरदर्शनके कारण प्रातः उठनेके लिए देर होती है।
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आपका विद्यार्थी जीवन आदर्श कैसे बनेगा ?
बालमित्रो, आगामी जीवनमें सफल होनेके लिए माता-पिता आपको विद्यालय भेजते हैं । उनका आपपरसे विश्वास उठ जाए, ऐसा कार्य न करें ।
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‘नकल’ शिक्षणक्षेत्रको दीर्घकाल लगा हुआ ‘कर्करोग’ है।
वार्षिक परीक्षामें केवल सामान्य बुद्धिमत्तावाले ही नहीं अपितु बुद्धिमान छात्र भी ‘नकल’ की कुप्रथामें फंसते हैं, यह सभी स्थानोंका अनुभव है ।
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विद्यार्थियो, पढाईमें आनेवाली अडचनें कैसे दूर करें ?
पढाईमें मन न लगना, यह सभी बच्चोंकी नित्य की समस्या है ! पिताजी दूरदर्शनपर समाचार देखते हैं और भैया उंचे स्वरमें गाना सुनते है; तब कैसे होगी पढाई ?
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विद्यार्थियो, श्री संकष्टनाशन गणपतिस्तोत्रका पारायण करें !
कुछ विद्यार्थियोंको परीक्षाका डर लगता है । ‘पढा हुआ ध्यानमें रहेगा ना ?’, ‘प्रत्यक्ष परीक्षामें लिखते समय स्मरण रहेगा ना?’ ऐसे प्रश्नोंसे विद्यार्थी तथा अभिभावकोंको तनाव आता है । इस पर आध्यात्मिक उपाय है गणपतिस्तोत्रका पारायण !
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विद्यार्थियों अभ्यास हेतु समयसारणी तैयार करें !
समयसारणी क्यों आवश्यक है ?
समयसारणी बनाते समय ध्यानमें क्या बातें रखनी चाहिए ?
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छात्रों, परीक्षाके समय विविध आध्यात्मिक उपाय कीजिए !
परीक्षाके लिए जानेसे पूर्व दस मिनट कुलदेवता अथवा अपने इष्ट देवताका नामस्मरण कीजिए ।
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छात्रों, परीक्षाकी कालावधिमें संतुलित आहार लें एवं उचित व्यायाम करें !
छात्रोंको सदैव संतुलित आहार लेना चाहिए एवं पर्याप्त व्यायाम सदैव करना चाहिए । किंतु परीक्षाकी कालावधिमें इनका विशेष ध्यान रखना चाहिए ।
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विद्यार्थियोंके मनसे परीक्षाका भय कैसे दूर करें ?
विद्यार्थी मित्रों, क्या आपको मौखिक परीक्षा, प्रायोगिक परीक्षा, शालेय एवं महाविद्यालयीन परीक्षा इत्यादिके समय मन पर तनावका अनुभव होता है ? क्या परीक्षाके समय नींद आना, पढाई करनेकी इच्छा न होना, एकाग्रताका अभाव, आत्मविश्वासका अभाव .........
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क्या आप एकाग्रता साध्य कर सकते हैं ?
पढ़ाई करते समय, चित्रकला या संगीत जैसी कला सीखते समय अथवा अन्य कोई कृति करते समय मनको एकाग्रताकी आवश्यकता होती है । एकाग्रता बढ़ानेके लिए सात्त्विकता बढ़ानी चाहिए । उसे बढ़ानेके लिए प्रस्तुत मुद्देंको आचरणमें लाएं ।
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