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पर्यावरणकी हानि किस कारण ?..
यह सब आज आधुनिकताके प्रभावसे हो रहा है । आज प्रत्येक मनुष्यमें विषय वासनाओंके अत्याधिक प्रभावके कारण तथा सत्यके ज्ञानका अभाव होनेसे मानव जीवनमें अनावश्यक विकृतियां जन्म ले रही हैं, उन्हें ही ‘पाप’ कहते है।
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वाहन एवं वायुप्रदूषण
विश्वके सभी देशोंको गाडियोंसे होनेवाले प्रदूषणका प्रश्न सता रहा है । उसका सजीव एवं निर्जीव दोनोंपर परिणाम हो रहा है ।
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ध्वनिप्रदूषण
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रतामें दूसरेको शांतिसे जीनेके अधिकारकी निश्चिंतता अंतर्भूत है । आपके विचार सुननेके लिए ध्वनिक्षेपककी अनिवार्यता आप नहीं कर सकते ।
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पर्यावरण
अपने आसपासका वातावरण अर्थात् पर्यावरण ! पर्यावरण प्रकृतिद्वारा संतुलित की जाती है । पर्यावरणमें मनुष्यका हस्तक्षेप बढनेसे, उसी प्रकार उसकी स्वार्थी एवं नियोजनशून्य वृत्तिके कारण संतुलन बिगड जाता है ।
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जलप्रदूषण
बढती लोकसंख्याके कारण घरेलू, गंदापानीr, साबुनयुक्त, तेलयुक्त, सेंद्रीय-असेंद्रीय पदार्थ ऐसे प्रकारके पानी बडे प्रमाणमें नदियां, नालोंद्वारा सीधे समुद्रमें आते हैं ।
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‘पर्यावरणीय युद्धतंत्र’के आवाहन्
‘गत कुछ वर्षोंसे शत्रुराष्ट्रोंको हराने हेतु शत्रुकी नैसर्गिक साधनसंपत्ति अधीनमें लेनेके साथ ही पर्यावरणको भी किसी शस्त्र समान प्रयोग किया जाता है !
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