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मधुराष्टकम् ।
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।। १ ।।
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श्रीरामजीकी आरती
श्रीरामचंद्र कृपाल भजु मन हरण भव भय दारुणम् ।
नवकंजलोचन,कंजमुख,कर-कंज,पद-कंजारुणम्।।१।।
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भगवान शिवजी की आरती
जय शिव ओंकारा ,भज शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्र्धंगी धारा ।।१।।
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श्रीदुर्गाजीकी आरती
जगजननी जय ! जय ! मा ! जगजननी जय ! जय !!
भयहारिणि,भवतारिणि,भवभामिनि जय जय ।।
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एकश्लोकिभागवतम्
आदौ देवकिदेविगर्भजननं गोपीगृहे वर्धनं
मायापूतनिजीवितापहरणं गोवर्धनोद्धारणम् ।
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शांति मंत्र
ॐ सह नाववतु | सह नौ भुनक्तु | सहवीर्यं करवावहै |
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एकश्लोकिमहाभारतम् ।
आदौ पाण्डवधार्तराष्ट्रजननं लाक्षागृहे दाहनं
द्यूते श्रीहरणं वने विहरणं मत्स्यालये वर्धनम् ।
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||श्रीदत्तात्रेयस्तोत्रम् ( नारदपुराण ) ||
जटाधरं पांडुरांगं शूलहस्तं कृपानिधिम् |
सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ||१||
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श्री कृष्णजीकी आरती
आरती कुंज बिहारीकी, श्री गिरिधर कृष्न मुरारी की ..
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श्री हनुमानजीकी आरती
आरती कीजै हनुमानललाकी । दुष्ट दलन रघुनाथ कलाकी ।।
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श्री अम्बे माताजीकी आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी
तुमको निस दिन ध्यावत
मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ||
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श्री हरि आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे .
भक्त जनोंके संकट-२, क्षणमें दूर करे ||
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श्री लक्ष्मी माताजीकी आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निस दिन सेवत, मैयाजीको निस दिन सेवत
हर विष्णु विधाता .
ॐ जय लक्ष्मी माता ||
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श्री गणेशजीकी आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ..
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हनुमान चालीसा
हनुमान चालीसा तुलसीदास की एक काव्यात्मक कृति है, जिसमें प्रभु राम के महान् भक्त हनुमान के गुणों एवं कार्यों का चालीस चौपाइयों में वर्णन है।
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