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शिक्षक ही सुसंस्कृत पीढी निर्माण कर सकते हैं !
शिक्षक यानी समाजके योग्य दिशानिर्देशक ! शिक्षक जिस पीढीका निर्माण करते हैं, वही पीढी राष्ट्रका कार्यभार संभालती है ।पर्यायसे राष्ट्रके पुनर्निर्माणकी मुख्य नींव ही शिक्षक हैं।
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अध्यापको, तनावसे मुक्त अध्यापन कर सुसंस्कृत भविष्यकी पीढी निर्माण करो !
वर्तमानमें अपने राष्ट्रकीr नई पीढी नीतिहीन बन गई है । बालकोंका चाल-चलन अयोग्य हो रहा है । बच्चे ‘कार्टून’जैसे विकृत कार्यक्रमोंके शिकार हो रहे हैं । बच्चोंमें स्वाभिमान एवं राष्ट्रनिष्ठा दिखाई नहीं देती ।
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अध्यापन एक साधना !
शिक्षाका उद्देश्य तथा शिक्षासे क्या प्राप्तकरना है, इसका विस्मरण हुई वर्तमान शिक्षाप्रणाली
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आजकी शिक्षा पद्धति तथा शिक्षकका कर्तव्य
आजकी स्थितिमें विद्यार्थियों पर संस्कार डालनेके लिए शिक्षकोंकी भूमिका महत्त्वपूर्ण है । उसपर यदि शिक्षक साधनाकरनेवाले हों तो उनके लिए यह सहज ही संभव होता है
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विद्यार्थियोंका शिक्षकोंके प्रति भाव कैसा होना चाहिए ?
प्राचीन कालमें शिक्षकोंको गुरु अथवा आचार्य संबोधित करते थे । गुरु-शिष्य परंपरा हिंदु संस्कृतिकी अनमोल विशेषता है ।
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विद्यार्थियोंमें आत्मविश्वास जागृत करनेकी आवश्यकता !
कोई भी निर्णय लेनेसे पूर्व स्वकीयों अथवा वरिष्ठोंसे उस विषयके बारेमें पूछना, यह मनुष्यप्राणीका स्वभाव होना ‘प्रतिदिन होनेवाली बच्चोंकी आत्महत्या आज राज्यस्तरपर चिंताका विषय बन गया है ।
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