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अभिभावक




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Article Image बच्चोंमें राष्ट्र एवं धर्मके प्रति
अभिमान कैसे निर्माण करें ?

वर्तमानमें हम यदि बच्चोंका अवलोकन करें तो ध्यानमें आता है कि बच्चोंमें राष्ट्र तथा धर्मके प्रति अभिमानका अत्यंत अभाव है । यदि यह स्थिति ऐसी ही रहती है तो राष्ट्रका विनाश होनेमें समय नहीं लगेगा । अत: हमें बच्चोंमें राष्ट्राभिमान निर्माण करने हेतु प्रयास करने ही होंगे ।

Article Image २ से ५ वर्षतकके बच्चोंपर
कौन - कौनसे संस्कार करें ?

बालमनपर जिस प्रकारके संस्कार किए जाते है, उसीके अनुसार आगेके कालमें बच्चोंका वैसा ही स्वभाव हो जाता है । बालआयुमें होनेवाले संस्कारोंके कारणही बच्चोंका व्यक्तित्व निर्भर करता है ।

Article Image बच्चोंपर अल्पायुमें ही संस्कार कैसे करें ?
संस्कारकी नींव अर्थात अनुशासन । प्रत्येक कृतिके लिए यदि अनुशासन, नियम नहीं बनाए, तो वह कृति अपूर्ण होती है । प्रात: उठनेसे लेकर रात्री सोनेतक अनुशासनका अचूकतासे पालन करें, तो अध्यात्ममें शीघ्र प्रगति होती है । उसके लिए बाल्यावस्थामें ही अनुशासनका संस्कार बालमनपर अंकित करना चाहिए ।

Article Image बच्चोंके व्यक्तित्वका विकास कैसे करें ?
‘अभिभावकों, हम केवल एक बच्चेके अभिभावक न होकर राष्ट्रके अभिभावक हैं । आज हम देखते हैं कि समाज एवं राष्ट्रकी स्थिति अच्छी नहीं है । इसका कारण यह है कि हम अभिभावकके रूपमें राष्ट्रको सुसंस्कारित पीढी नहीं दे सके ।

Article Image आज प्रत्येकको जीजामाताका
आदर्श लेना आवश्यक है !

‘छत्रपति शिवाजीने हिंदवी राज्यकी, अर्थात आदर्श हिंदू राष्ट्रकी स्थापना की । हिंदू राष्ट्र निर्माण हो, इसकी जन्मघुट्टी जीजामाताने उन्हें बाल्यवस्थामें ही पिलाई थी ।

Article Image अभिभावक अपने बच्चोंके साथ
किस प्रकारके व्यवहार करें ?

१. बच्चे पर अपना अधिकार नहीं जमाएं; अपितु उनके साथ मित्रताका व्यवहार करें ।
२. प्रत्येक कृत्य करनेके लिए प्रेमसे कहें ।

Article Image आदर्श अभिभावक
जो अपने बच्चेको उसमें स्थित दोष दूर कर उसमें सदगुण लाने हेतु सहायता करता है, वास्तवमें वही अभिभावक । वर्तमानमें अभिभावककी परिभाषा क्या होती है ?

Article Image अभिभावको, बच्चोंको सफलता
प्राप्त करनेमें सहायता करें !

अपने बच्चेको उत्तम गुण प्राप्त हों, वे जीवनमें सफलता प्राप्त करें, प्रत्येक अभिभावककी ऐसी इच्छा रहती है । अर्थात उसमें उसकी कोई भी भूल नहीं; परंतु सफलता प्राप्त करनेके संदर्भमें अभिभावकोंको सभी संकल्पनाएं सुस्पष्ट होनी चाहिए !

Article Image अभिभावकोंके कर्तव्य कौनसे हैं ?
ई.स. १९५० में बालक एवं युवा बच्चोंके संबंधमें मिड सेंच्युरी वाईट हाऊस परिषदमें विद्यमान सभासदोंद्वारा ली गई शपथमें समाविष्ट अभिभावकोंके मुख्य कर्तव्य एवं बच्चोंको दिए आश्वासन आगे दिए अनुसार हैं ।

Article Image आदर्श अभिभावकोंके गुणधर्म कौनसे हैं ?
आदर्श अभिभावक बननेके लिए आवश्यक महत्त्वपूर्ण गुणोंका विवेचन आगे दिया गया है ।

Article Image बच्चोंका भय कैसे दूर करें ?
भयके कारण मनुष्य संकटके प्रसंगोंसे दूर भागता है । आग अथवा गुंडोंसे दूर भागता है, उस समय उनका भय योग्य होता है;रंतु काल्पनिक कथाएं एवं अंधेरा, तिलचट्टा इत्यादि विषयोंका भय अयोग्य है ।

Article Image अभिभावकों, बच्चोंको अनुशासित करनेके लिए प्रतिदिन निम्न कृति करें !
बच्चे अनुकरणप्रिय होते हैं । जन्मसे ही वे अपने मां-पिताका सतत निरीक्षण करते हैं । इस कारण अधिकांश बच्चोंके चलने, बोलने एवं आचरण करनेका पद्धति अपने माता-पिताके समान होती है ।

Article Image बालकोंको अनुशासनप्रिय कैसे बनाएं ?
अनुशासन और दंड, इन दोनों शब्दोंकी निर्मिति शिक्षा शब्दसे हुई है । शिक्षाकी सहायतासे अच्छा आचरण करनेका अर्थ ही अनुशासन है । इसलिए दंड किस कारणसे व किसी भूल अथवा अनाचारके लिए देना है, यह समझकर ही दंड देना चाहिए ।

Article Image यदि आपको लगता है कि
'आपके बच्चे आदर्श बच्चे बनें' तो.....

यदि आपको लगता है कि ‘आपके बच्चे आदर्श बच्चे बनें' तो ‘जैसी कथनी वैसी करनी’, इस संतवचनकी भांति हम पालकोंको भी आदर्श प्रस्तुत करना होगा ।

Article Image अध्ययनका महत्त्व बच्चोंके मनपर कैसे अंकित करें ?
बच्चोंको सदा शास्त्रज्ञ कुशाग्रबुद्धिके प्रसिद्ध व्यक्तित्वकी उत्तम कहानियां सुनाएं तथा बडे पदको प्राप्त करनेके लिए उन व्यक्तियोंको क्या परिश्रम करने पडे इसकी जानकारी बच्चोंके मनपर प्रभावकारी रूपसे अंकित हो..

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