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राष्ट्राभिमान जागृत करनेवाले कृत्य कर खरे अर्थमें गणतंत्र दिवस मनाएं !
राष्ट्राभिमान एवं राष्ट्रप्रेम जागृत करनेवाले कृत्य तथा आदर्श गणराज्य बनें इस हेतु की जानेवाली मांगें इस लेखमें बताई गई हैं । वैसे कृत्य करनेसे ही आदर्श गणराज्य आएगा तथा तभी हम खरे अर्थमें देशके लिए, अर्थात हमारे लिए क्रांतिकारियोंके किए बलिदानका ऋण चुका सकते हैं ।
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बाबाराव सावरकर
क्रांतिवीर गणेश दामोदर तथा बाबाराव सावरकर स्वा. विनायक दामोदर सावरकरजीके बडे भाई । उन्होंने ही स्वा. सावरकरको पितृतुल्य प्रेम देकर, बहुत कष्ट भोगकर छोटेसे बडा किया एवं क्रांतिकार्यमें उनके बराबर सहभागी हुए ।
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चंद्रशेखर आजाद
चंद्रशेखर आजादका जन्म मध्यभारतके झाबुआ तहसीलके भाबरा गांवमें हुआ था । उनके पिताका नाम पंडित सीताराम तिवारी एवं माताका नाम जगदानीदेवी था । बनारसमें संस्कृतका अध्ययन करते समय १४ वर्षकी आयुमें उन्होंने कानूनभंग आंदोलनमें योगदान दिया था ।
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डॉ. हेडगेवार : एक असामान्य व्यक्तित्व
हमारे समाजका पुनरुत्थान करने हेतु विशाल जनसमुदायको एकत्रित लानेके लिए आद्य सरसंघचालक पू. डॉ. हेडगेवारका कठोर प्रयास था । इसमें उनका किसी भी प्रकारका व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं था ।
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दादाभाई नौरोजी
४ सितंबर, १८२५ को दादाभाई नौरोजी का जन्म मुंबईमें हुआ था। उनकी शिक्षा यहांके ‘नेटिव एजुकेशन सोसाइटी’ नामक संस्थाकी पाठशालामें हुई ।अपनी शिक्षा पूर्ण करनेपर वे एलफिन्स्टन महाविद्यालयमें गणितके अध्यापकके रूपमें काम संभाला ।
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बाजीप्रभू देशपांडे
बाजीप्रभु देशपांडे स्वयं पराक्रमी योद्धा थे; साथ ही वे त्यागी, स्वामीनिष्ठ, तत्त्वनिष्ठ एवं किसी भी प्रलोभनके वशमें आनेवाले नहीं थे । पचास वर्षकी आयुमें बिना थके हुए, दिनके २०-२२ घंटा काम करनेवाले बाजीका संपूर्ण मावल प्रांतमें प्रभाव था ।
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हुतात्मा भगतसिंह
सरदार भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त एवं भगवतीचरण वोरा आदि स्वतंत्रता सेनानी ‘हिंदुस्थान सोशलिस्ट रिपब्लिकन असोसिएशन’ संघटनाके सभासद थे ।
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गुरु गोविंद सिंह - संतोंके क्षात्रधर्म का उत्तम उदाहरण !
गुरु गोविंद सिंहजी सदा-सर्वदा ऐसे विचार करनेवाले थे । उनकी माताका नाम गुजरी एवं पिताजीका नाम गुरु तेगबहादुर सिंहजी था । गुरु गोविंद सिंहजीने जीवनभर क्षात्रधर्म साधना की ।
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२६ जनवरी : गुणवत्तापूर्ण प्रजातंत्रके लिए
नागरिकोंको जन्मसे ही मूलभूत (आधारभूत) अधिकार प्रदान किए गए हैं । मूलभूत अधिकारोंमें भाषण, संचार, शिक्षा, प्रचार एवं स्वतंत्रता आदि अधिकार आते हैं।
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४० सहस्र भारतीय स्त्री-पुरुषोंके सहयोगसे स्थापित ‘आजाद हिंद सेना’ !
अंग्रेजोंके विरोधमें लडने हेतु नेताजी सुभाषचंद्र बोसद्वारा ४० सहस्र भारतीय स्त्री-पुरुषोंके सहयोगसे ‘आजाद हिंद सेना’की स्थापना की गई थी । ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा’ ऐसा आवाहन किया गया था ।
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`हिंमत साहस है तो मुझपर गोली चलाओ - शिरीषकुमार
गुजराती थी मातृभाषा हो बोलनेवाले शिरीषने पदयात्रामें घोषणाएं देना आरंभ किया, 'नहीं नमशे, नहीं नमशे', 'निशाण भूमी भारतनु' । भारत माताका जयघोष करते हुए यह यात्रा गांवसे जा रही थे ।
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खुदीराम बोस
भारतके सबसे युवा क्रांतिकारीके रूपमें परिचित खुदीराम बोस अपनी आयुके केवल १९ वें वर्षमें ही वीरगतिको प्राप्त हुए । उनका जन्म बंगालमें स्थित जिलेके बहुवेनी गांवमें हुआ था ।
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क्रांतीकारी जतींद्रनाथ दास
राजकीय कैदियोंकी यातनाएं बंद होनेके लिए ६१ दिनोंके उपोषणका अग्निदिव्य करके स्वयंको राष्ट्रके लिए समर्पित करनेवाले क्रांतीकारी जतींद्रनाथ दास !
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लाला लाजपत राय
लाला लजपतरायको पंजाबका केसरी (शेर) कहा जाता था । वे सचमुच पंजाबके ही नहीं, संपूर्ण भारतके केसरी थे । वे जब बोलते थे, तो केसरीकी ही भांति उनका स्वर गूंजता था ।
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आजाद हिंद सेनाकी कप्तान ‘लक्ष्मी’
‘कप्तान लक्ष्मीका जन्म २४.१०.१९१४ को मद्रासमें (चेन्नईमें) हुआ था । इ.स. १९३८ में २४ वर्षकी आयुमें उन्होंने एम.बी.बी.एस. की परिक्षामें उत्तीर्ण की ।
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