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वाल्या ऋषि वाल्मिकी बने
बालमित्रो, आज हम वाल्या मछुआरे एवं नारदमुनिकी कथा सुनेंगे । प्राचीनकालमें एक वनमें वाल्या नामका एक मछुआरा रहता था ।
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बचपनसे ही अलौकिक तत्त्वके स्वामी (आद्यगुरु) शंकराचार्य
बालमित्रों, भगवान शंकराचार्य भारतवर्ष की एक दिव्य विभूति हैं । उनकी कुशाग्र बुद्धिको दर्शानेवाली एक घटना है । सात वर्षकी आयुमें ही शंकरके प्रकांड पांडित्य तथा ज्ञानसामथ्र्यकी कीर्ति सर्व ओर पैâलने लगी ।
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असुरोंके विनाश हेतु सर्वस्वका त्याग करनेवाले ऋषि दधीचि !
वृत्रासुरका नाश करनेके लिए दधीचिऋषिने अपने प्राण सहजतासे दे दिए । इससे ध्यानमें आता है कि ऋषिमुनि कितने महान थे।
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