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गोवर्धन पर्वत
भगवान श्रीकृष्णको सब जानते हैं ना ? वे गोकुलमें रहते थे । वहां गोवर्धन नामका एक बडा पर्वत था । गोकुलमें श्रीकृष्णके साथ सारे गोप-गोपी आनंदसे रहते थे । हर वर्ष अच्छी बारिश हो, इस हेतु वे इंद्रभगवानकी पूजा करते थे ।
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भक्त प्रल्हाद
बच्चो, प्रल्हादकी नामसाधनासे भगव्न नारायणने प्रत्येक समय प्रल्हादकी सुरक्षा की । यदि हम भी नामस्मरण करें तो आपातकालमें प्रभु हमारी रक्षा करेंगे ! यह इस कथासे हम देखेंगे ।
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गणपति
बच्चो, गणपति ज्ञानके देवता हैं । ये हमारे बुदि्धदाता हैं । इन्हें सारे विघ्न दूर करनेवाले भगवान अर्थात `विघ्नहर्ता ' भी कहते हैं । आज देखते हैं, उनके दूसरे अनेक नामोंमें ‘चिंतामणि' नाम उन्हें कैसे मिला ।
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सत्सेवाका महत्त्व !
सेवाका अर्थ है, भगवानको जो अच्छा लगे वह काम करना; भगवानके कार्यमें सम्मिलित होना, यही भगवानकी सेवा है । यदि हम काममें मां का हाथ बटाएं, तो मां को अच्छा लगेगा या नहीं ? तब मां हमें मिठाई देगी तथा हमें प्यार करेगी । उसी प्रकार हमने भगवानकी सेवा की, तो भगवान भी हमें प्यार करेंगे ।
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पंढरपुरकी वारी
वारकरी संप्रदायमें की जानेवाली पंढरपुरकी वारी भी एक साधनामार्ग ही है । यह कर्मकांडकी साधना हैं ।
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पंढरपुरमें पांडुरंगकी मूर्तिकी स्थापना
`‘हे पांडुरंग, आपके चरण समचरण हैं । उनमें द्वैत नहीं है । ऐसे स्वरूपमें आप इन दो इंटोंपर (द्वैतपर) अद्वैत स्वरूपमें खडे हैं ।'’
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विठ्ठल : महाराष्ट्रके आराध्य देवता
श्री विठ्ठलके सर्व भक्तगणोंका भाव भोला होनेके कारण उन्हें `भक्तकी रक्षा करनेवाले आराध्यदेवता', ऐसे संबोधित किया जाता है ।
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महिषासुरमर्दिनी दुर्गादेवी
नवरात्रिके प्रथम दिन दुर्गा अथवा महाकाली देवीकी घटस्थापना की जाती है । नौ दिन तक दुर्गादेवी का नवरात्रि उत्सव मनाया जाता हैं ।
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गणपतिका मारक रूप
बच्चों, आज हम अपने प्यारे गणपति बाप्पाकी कथासे परिचित होंगे । हम सब गणपतिजीके तारक रूपसे परिचित हैं, जिसमें गणपतिका एक हाथ आर्शीवाद देनेवाला एवं करूणामय दृष्टि है ।
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रामभक्त हनुमान
एक दिन मां सीता अपनी मांगमें सिंदूर भर रही थीं । यह देखकर हनुमानजीने उनसे पूछा, ‘सीतामैय्या, आप प्रतिदिन यह सिंदूर क्यों लगाती हैं ?
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