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By Bal Sanskar

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प्रतिक्रिया

Bhaskar tiwari
February 17, 2013, 12:36 pm

Mai kumbh me gaya waha par aapki pradarsni dekhi mujhe bahut aaccha laga aapka prayas bahut hi sarahniy hai.jis tarah se hindu dharma ko bchane ke prayas usme btaye gye hai.hum bahut khush hai.kamna krte hai.ye aur aage bade....badta hi rhe..
जवनाराम माली
August 10, 2012, 11:09 pm

वेरी good
rajkumar
September 13, 2011, 7:07 pm

APKA PRAYAS BAHUT SUNDAR HAI. YADI AAJ KI PEERHI (BAACHCHEN) YE SAHITYA/YESI PUSTAKEN PADHENGE UNME BATANE MARG PAR CHALENGE TO HAMARA BHARAT PHIR SE VISHVA GURU BAN JAYEGA.
बलविंदर अगरवाल
September 12, 2011, 3:31 pm

आपका प्रयास सराहनीय है

Ram Tripathi
July 16, 2011, 10:27 pm

आपका प्रयास सराहनीय है। पश्चिमी नग्न सभ्यता की आँधी को आपने भारतीय सभ्यता की ध्वजा उठा कर आगे बढने से रोक दिया। हमेँ आप पर गर्व है।
daksh
June 7, 2011, 4:35 pm

पेहले तो बताने का कस्त करे कि ये बाल संस्कार किया हे ?

ओर राही बात अपने संस्कार कि तो आज हम अपने वजूद से डाग मग राहे हे कियू का कोई कारण नाही होता
ये तो सब वेस्टर्न वूनियादी राही हे अंग्रेजो ने हमारी संस्कीरीती को हमेसा नकार हे
ओर अपने वेस्टर्न education को हमारे उपर थोप कर हमे सभ्येता का नाम दिया जबकी हमारे लिये इंडिया ओर इंडिअन के नाम से जाणणे लागे ही ओर हम भी उनही कि वाडी मी वाडी मिला राहे हे किया हमे नाही पट कि अंग्रेजी मी इंडिअन साबड आदिवासी ओर खानाबदोष को कहा जाता हे ओर हम खुसी खुसी अपने को इंडिअन कः कर खुद का माझाक
बना देते हे कियू भारत बोलणे मै सर्म आती हे
अखिलेश अ Singh
May 24, 2011, 12:30 am

.......
विजय सोनी अधिवक्ता
May 3, 2011, 9:00 pm

अंग्रेजी के अंधानुसरण ने हमारे संस्कारो पर दिनप्रतीदिन घात पर घात जारी रखा है,कहने को हमने अंग्रेज भाग दिये किंतु हम आज भी इसके गुलाम बने हुवे है ,बालसंस्कार बधाई का पात्र है जिसके द्वारा अपने असली संस्कारो की चिंता की गई है .
रवि शर्मा
April 13, 2011, 5:40 pm

क्रीय्पा मुझे ऐसे हि अच्ची सांगत बातेईन मैल karein
मेरा जन्मदिन २५-०५-१९८४ को हुआ था तिथी बताये
February 25, 2011, 1:44 am

धन्यबाद
जोगेश मिश्र
November 26, 2010, 7:17 pm

sunder
सत्यनारायण सोनी
September 22, 2010, 1:45 pm

हम अपनी जडो से दूर होते जा रहे है और अपनी पहचान खोते जा रहे है. इस समय हमे वेदो की ओर लौत्णे की जरूरत है. अपनी सभ्यता और संस्कृती को पुनर्जीवित करणे का याह प्रयास अत्यंत सराहानीय है. धन्यवाद.
gyanesh Tripathi
September 18, 2010, 3:19 pm

It is very innovative concept which will help amny Indian familis find their roots and attach them to what they actually want to be attached.
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