जब भी दास्यभक्तिका सर्वोत्कृष्ट उदाहरण देना हो, तो आज भी हनुमानकी रामभक्तिका स्मरण होता है । प्रभु रामकी सेवाकी तुलनामें शिवत्व एवं ब्रह्मत्वकी इच्छा भी उन्हें कौडीके मोल लगती । हनुमान अर्थात् शक्ति एवं भक्तिका संग । अंजनीको भी दशरथकी रानियोंके समान तपश्चर्याद्वारा पायस (चावलकी खीर, जो यज्ञ-प्रसादके तौरपर बांटी जाती है) प्राप्त हुई थी एवं उसे खानेके उपरांत ही हनुमानका जन्म हुआ था । उस दिन चैत्रपूर्णिमा थी, जो ‘हनुमान जयंती’ के तौरपर मनाई जाती है । इस वर्ष हनुमान जयंती ६ अप्रैलको है ।
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प्रचलित पूजा
चैत्रपूर्णिमाके दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है । प्रायः शनिवार एवं मंगलवार हनुमानके दिन माने जाते हैं । इस दिन हनुमानको सिंदूर एवं तेल अर्पण करनेकी प्रथा है । कुछ स्थानोंपर तो नारियल चढानेकी भी रूढि है । आध्यात्मिक उन्नतिके लिए वाममुखी (जिसका मुख बार्इं ओर हो) हनुमान अथवा दासहनुमानकी मूर्तिको पूजामें रखते हैं । हनुमान जयंती पर ‘श्री हनुमते नम:’ नामजप करनेसे हनुमानतत्त्वका अधिकाधिक लाभ होता है ।
हनुमानको तेल, सिंदूर, मदारके पत्ते इत्यादि अर्पित करनेका कारण
पूजाके दौरान देवताओंको जो वस्तु अर्पित की जाती है, वह वस्तु उन देवताओंको प्रिय है, ऐसा बालबोध भाषामें बताया जाता है, प्रत्यक्षमें शिव, विष्णु, गणपति जैसे उच्च देवताओंकी कोई पसंद-नापसंद नहीं होती। देवताको विशेष वस्तु अर्पित करनेका तात्पर्य आगे दिए अनुसार है ।
May 13, 2011, 4:57 am
जय श्री कृष्ण ,
धन्यवाद
आपकी website देखी, आप सबको धन्यवाद , बच्चो और सबके लिये बहोत हि अच्छा
सरल भाषा में हैं, ईश मैं बहोत सारा सबको अध्यात्मिक जानकारी मिलती हैं .
प्रभू कि कृपा सदा आप पर रहे, यही प्रभू से मेरी प्राथना....
प्रवीण पटेल
पोर्तुगाल ( लीस्बोन )