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योगासन : निरोगी एवं आनंदी जीवनकी गुरुकुंजी !

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By Bal Sanskar


 

         शरीरको सुदृढ करने हेतु किए जानेवाले एरोबिक्स जैसे शारीरिक व्यायामोंसे कुछ मात्रामें मनोरंजन होता है । प्राचीन ऋषिमुनियोंकी देन योगासनसे शारीरिक व्यायाम होता है; साथ ही शरीरमें विद्यमान सुप्त शक्तियां जागृत होती हैं तथा उन्हें आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है और मानसिक तथा बौद्धिक क्षमतामें भी वृद्धि होती है । ऋषिमुनि नित्य योगासन करते हैं, इसी कारण हिमालयके प्रतिकूल वातावरणमें भी अनेक वर्ष निरोगी रहते हैं । योगासनके कारण मधुमेह, रक्तदाब, संधिवात (गठिया) जैसे व्याधियोंको में किया जाता है । आजकल योगासनके अनेक अनुभव हम दूरचित्रवाहिनीद्वारा देखते तथा सुनते हैं ।

            बालमित्रों, निरोगी एवं दीर्घायु जीवनकी यह गुरुकुंजी है आजसे ही हम अपने जीवनमें इसे अपनाऐंगे, तो हम सभीका जीवन आनंदित होगा !

संदर्भ : सनातन निर्मित ग्रंथ ' सुसंस्कार एवं उत्तम व्यवहार'

 




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