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दत्तकी उपासनाका शास्त्र क्या है ?

मूल्यांकन : Average Rating : 4.50 From 2 Voter(s) | पढ़ा गया : 956
By Bal Sanskar

दत्तकी उपासनाका शास्त्र        

         आधारभूत शास्त्रको समझकर देवताकी उपासना करनेसे उपासना अधिक श्रद्धापूर्वक होती है । श्रद्धापूर्वक की गई उपासनाका फल भी अच्छा मिलता है । उपासनासे संबंधित कृति अध्यात्मशास्त्रीय दृष्टिकोणसे और योग्य पद्धतिसे होना भी आवश्यक है, क्योंकि ऐसी कृतिसे ही अधिक फल प्राप्त होता है । यह उद्देश्य ध्यानमें रखकर यहां दत्तात्रेयकी उपासनाका आधारभूत शास्त्र दिया गया है ।

        दत्तात्रेयपूजन आरंभ करनेसे पूर्व छिगुनी यानी छोटी उंगलतीके पासवाली उंगली ‘अनामिका’से अपने मस्तकपर विष्णु समान दो रेखावाला खड़ा तिलक लगाएं । इस प्रकार टीका लगानेसे दत्तात्रेयतत्त्वका लाभ अधिक मिलता है । साथ ही गंधकी सात्त्विकताके कारण भावजागृति होती है एवं पूजामें मन शीघ्र ही एकाग्र होता है । इस कारण पूजासे मिलनेवाला चैतन्य अधिक ग्रहण किया जा सकता है । 

        दत्तात्रेयपूजनमें उन्हें छिगुनीके पासवाली उंगली ‘अनामिका’से तिलक लगाएं । हलदी-कुमकुम चढ़ाते समय पहले हलदी एवं बादमें कुमकुम दाहिने हाथके अंगूठे एवं अनामिकामें चुटकीभर लेकर उनके चरणोंपर चढ़ाएं । पूजा करनेसे पूर्व पिछले दिनका निर्माल्य (पिछले दिनके बासे फूल) निकालते समय भी अंगूठे तथा अनामिकाका ही प्रयोग करें । अंगूठे एवं अनामिकाको जोड़नेसे तैयार मुद्राके कारण शरीरमें अनाहतचक्र जागृत होता है एवं इससे भक्तिभाव बढ़ता है ।

        विशिष्ट फूलोंमें विशिष्ट देवताका तत्त्व आकृष्ट करनेकी क्षमता अन्य फूलोंकी तुलनामें अधिक होता है । निशिगंधाके फूलोंमें दत्तात्रेयका तत्त्व आकृष्ट करनेकी क्षमता सर्वाधिक होनेके कारण उन्हें ये फूल चढ़ानेसे दत्ततत्त्वका अधिक लाभ मिलता है । देवताके चरणोंमें फूल विशिष्ट संख्यामें एवं विशिष्ट संरचनामें चढ़ानेसे फूलोंकी ओर उस देवताका तत्त्व शीघ्र आकृष्ट  होता है । इसलिए दत्तात्रेय देवताको सात अथवा सातकी गुनामें चतुष्कोन आकारमें (शक्करपारेके आकारमें) फूल चढ़ाएं । 


दत्तात्रेय देवताके उपासना हेतु की जानेवाली कृतियोंका शास्त्र

गंध लगाना/हल्दी-कुमकुम चढाना : दत्तात्रेयको अनामिकासे गंध लगाए । हल्दी-कुमकुम चढाते समय पहले हल्दी एवं बादमें कुमकुम अंगूठा एवं अनामिकाकी चुटकीमें लेकर चरणोंपर चढाए । अंगूठा एवं अनामिका जोडकर तैयार  होनेवाली मुद्राके कारण शरीरका अनाहतचक्र जागृत होनेसे भक्ति-भाव निर्माण होता है एवं उससे देवताका तत्त्व ग्रहण होनेमें सहायता मिलती है ।

फूल चढाना : अन्य फूलोंकी अपेक्षा जूही एवं रजनीगंधा इन फूलोंमें दत्ततत्त्व आकृष्ट करनेकी क्षमता सर्वाधिक होनेके कारण वह फूल दत्तात्रेय देवताको चढानेपर दत्ततत्त्वका लाभ अधिक प्रमाणमें होता है । 

उदबत्ती दिखाना : चंदन, केवडा, अंबर एवं हीना इस गंधकी ओर दत्ततत्त्व शीघ्र आकृष्ट होनेके कारण इस गंधकी  उदबत्तीका दत्तपूजामें उपयोग करनेपर दत्ततत्त्वका लाभ अधिक प्रमाणमें प्राप्त होनेमें सहायता मिलती है । 

प्रदक्षिणा करना : देहमें विद्यमान सप्त चक्रोंकी शुद्धि करनेवाले दत्तात्रेय है; अत: दत्तको सात अथवा सातके गुनामें प्रदक्षिणा करें ।

 



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प्रतिक्रिया

भारत सिंघ भदौरिया
July 9, 2012, 5:36 pm

GOOD
सिबाणु bora
December 25, 2010, 3:27 pm

संस्कृत मे कूच और अर्तीकॅल लिखा करिये
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