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विद्यार्थियो, दुर्गुणोंका त्याग करो और सद्गुणी बनो !

मूल्यांकन : Average Rating : 5.03 From 31 Voter(s) | पढ़ा गया : 8145
By Bal Sanskar

१.  अपने सहपाठियोंको चिढाना, मारना जैसे कष्ट न दें !

२.  कक्षाके चलते खाद्यपदार्थ न खाएं !

३.  सवेरे शीघ्र उठनेमें आलस्य न करें और विद्यालयमें समयपर पहुंचें !

४.  विद्यलयमें बताया गया गृहपाठ अपूर्ण न रखें !

५.  ‘पी.टी.’ करनेका मन नहीं करता, इसलिए अस्वस्थ होनेका झूठा कारण न बताएं !

६.  परीक्षाके समय ‘कॉपी’ न करें अथवा एक-दूसरेको उत्तर न बताएं !

७.  विद्यार्थियोंके गणवेशको रंग लगाने जैसी अयोग्य चेष्टा न करें !

८.  मित्र अनुपस्थित होते हुए भी उसकी उपस्थिति न लगाएं !

९.  किसी विद्यार्थीने खानेका डिब्बा न लाया हो, तो उसे अपने डिब्बेका पदार्थ दें !

१०. शिक्षकोंके विनोदी नाम न रखें । उनका अनादरपूर्वक उल्लेख न करें !

११. शिक्षकके पढाते समय उसकी अनदेखी कर, उपद्रव न मचाएं !

१२. शिक्षकोंको उल्टा उत्तर देना, नए शिक्षकोंकी भांड (नकल) करना इत्यादि न करें !

         विद्यार्थी मित्रों, ‘अपना विद्यालय विद्याकी देवी श्री सरस्वतीका देवालय है’, ऐसा भाव रख अपना ‘विद्यामंदिर’ पवित्र रखें । इससे सरस्वतीदेवी प्रसन्न होंगी और हमें अच्छी विद्या मिलेगी ।






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