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गणपति
बच्चो, गणपति ज्ञानके देवता हैं । ये हमारे बुदि्धदाता हैं । इन्हें सारे विघ्न दूर करनेवाले भगवान अर्थात `विघ्नहर्ता ' भी कहते हैं । आज देखते हैं, उनके दूसरे अनेक नामोंमें ‘चिंतामणि' नाम उन्हें कैसे मिला ।
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श्री स्वामी समर्थ !
दत्त संप्रदायमें श्रीपाद श्रीवल्लभ तथा नृसिंह सरस्वती दत्तात्रेयके पहले तथा दूसरे अवतार माने जाते हैं । श्री स्वामी समर्थ ही नृसिंह सरस्वती हैं अर्थात दत्तावतार हैं ।
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सत्सेवाका महत्त्व !
सेवाका अर्थ है, भगवानको जो अच्छा लगे वह काम करना; भगवानके कार्यमें सम्मिलित होना, यही भगवानकी सेवा है । यदि हम काममें मां का हाथ बटाएं, तो मां को अच्छा लगेगा या नहीं ? तब मां हमें मिठाई देगी तथा हमें प्यार करेगी । उसी प्रकार हमने भगवानकी सेवा की, तो भगवान भी हमें प्यार करेंगे ।
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श्रीवल्लभाचार्य
भक्तिकालीन सगुणधाराकी कृष्णभक्ति शाखाके आधारस्तंभ तथा पुष्टिमार्गके प्रणेता श्रीवल्लभाचार्यजीका जन्म संवत १५३५, वैशाख कृष्ण एकादशीके दिन काशीके निकट दक्षिण भारतके कांकरवाडग्राममे हुआ । उन्हें अग्निका अवतार कहा गया है । वे वेदशास्त्रोंमें प्रवीण थे ।
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श्री वासुदेवानंद सरस्वती (१८५४-१९१४)
संत वासुदेवानंद सरस्वती श्री टेंब्येस्वामीके नामसे भी पहचाने जाते थे । उनका उपनाम वासुदेव, पिताजीका गणेशभट्ट, एवं माताजीका रमाबाई तथा दादाजीका नाम हरिभट्ट था ।
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संत सावता माली
संत सावता माली संत ज्ञानदेवके समयके एक प्रसिद्ध संत थे । उनका जन्म इ. स. १२५० का है तथा उन्होंने इ. स. १२९५ में देह त्यागी । अरण-भेंड यह सावतोबाका गांव है । सावता मालीके दादाजीका नाम देवु माली था, वे पंढरपुरके वारकरी थे ।
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संत तुकाराम : भागवतधर्म मंदिरका कलश !
मराठी भक्तिपरंपरामें अनन्यसाधारण स्थान रखनेवाले संत तुकाराम महाराजने संसारके सर्व सुख-दुःखोंका सामना साहससे कर अपनी वृत्ति विठ्ठलचरणोंमें स्थिर की । भागवतधर्म मंदिरका कलश अर्थात संत तुकाराम महाराजकी जानकारी देनेवाला यह लेख ...
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मित्रों,गुढीपाडवाको नववर्ष समारोह मनाकर ‘हिंदू राष्ट्र’के निर्माणका संकल्प करें !
‘इस दिन ब्रह्मदेवने सृष्टिका निर्माण किया । आदर्श जीवनयापन करनेवाले प्रभू श्रीरामद्वारा असुररूपी रावणका वध भी इसी दिन किया गया था ।’ मित्रो, यह इस दिनका महत्त्व है ! हमें भी इस दिन अनिष्ट कृत्योंका विनाश कर आदर्श जीवनका आरंभ करना चाहिए ।
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लोकमान्य तिलक !
‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है तथा मैं वह अवश्य प्राप्त करूंगा’ इस सुपरिचित वाक्यके कारण हम उन्हें ‘लोकमान्य\\'के नामसे जानते हैं; परंतु तिलकजीकी वृत्ति बाल्यावस्थासे ही निर्भयी एवं तेजस्वी किस प्रकार थी, यह हम इस कथासे समझ लेते हैं ।
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राष्ट्राभिमान जागृत करनेवाले कृत्य कर खरे अर्थमें गणतंत्र दिवस मनाएं !
राष्ट्राभिमान एवं राष्ट्रप्रेम जागृत करनेवाले कृत्य तथा आदर्श गणराज्य बनें इस हेतु की जानेवाली मांगें इस लेखमें बताई गई हैं । वैसे कृत्य करनेसे ही आदर्श गणराज्य आएगा तथा तभी हम खरे अर्थमें देशके लिए, अर्थात हमारे लिए क्रांतिकारियोंके किए बलिदानका ऋण चुका सकते हैं ।
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संत मच्छिंद्रनाथजीका जन्म
एक बार शिवजी क्रोधवश कैलाश पर्वत एवं गौरीको छोडकर एक घनघोर जंगलमें आकर रहने लगे तथा वहीं समाधिस्थ हो गए । गौरीने बहुत ढूंढा; परंतु शिवजी नहीं मिले । अचानक नारदमुनि वहां आए ।
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महाशिवरात्रिके उपलक्ष्यमें स्वयंके दुर्गुण नष्ट करें एवं शिवजीकी कृपा संपादित करें !
अपने देवताओंका उपहास तथा अनादर रोकना ही देवताकी खरी भक्ति करने जैसा है । निम्नलिखित लेखमें शिवजीकी जानकारी, उनका कार्य, उनकी उपासनापद्धति तथा शिवजीकी भक्ति करनेसे होनेवाले लाभ इत्यादिके विषयमें सूत्र देखेंगे ।
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विद्यार्थी मित्रो, नई कलाएं सीखकर छुट्टीको सार्थक करें !
विद्यार्थी मित्रो, अब अपकी परीक्षाएं समाप्त होकर छुट्टी आरंभ हुई है । छुट्टी अपने व्यक्तित्त्वको सुंदर आकार देनेवाली एवं नए-नए कलाकौशल सीखनेकी मुक्त पाठशाला ही है ।
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बच्चो, अपने सद्गुणोंकी सहायतासे शिक्षाव्यवस्थाके दुष्परिणामोंको मातकर गुणसंपन्न बनें !
छात्रो, आज हम जिस शिक्षाव्यवस्थासे शिक्षा ठाहण कर रहे है, वह व्यवस्था संपूर्णरूपसे केवल 'परीक्षा पद्धति' है ! विद्यार्थीको कितने प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं, उसपर उस बालककी गुणवत्ता उच्च अथवा निम्न सिद्ध होती है ।
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बाबाराव सावरकर
क्रांतिवीर गणेश दामोदर तथा बाबाराव सावरकर स्वा. विनायक दामोदर सावरकरजीके बडे भाई । उन्होंने ही स्वा. सावरकरको पितृतुल्य प्रेम देकर, बहुत कष्ट भोगकर छोटेसे बडा किया एवं क्रांतिकार्यमें उनके बराबर सहभागी हुए ।
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